seo tutorial in hindi

अपने साइट पर ट्रैफिक बढ़ाने के लिए 30 seo techniques

आप पढ़ रहे है SEO tutorials in hindi ; SEO की सामान्य समझ आपके ब्लॉग को सीधे आसमान में पंहुचा सकती है। आप चाहे तो SEO को समझे बिना बस ब्लॉग पोस्ट करते जाते है और अंत में कहते है कि ब्लॉग्गिंग बहुत कठिन है क्योंकि Search Engine आपके ब्लॉग को रैंक नहीं कर रहा, तो मित्र आप गलत हो, वास्तव में आपने ही अपने ब्लॉग को search engine के अनुकूल नहीं बनाया है, और इसी कारण search engine आपके ब्लॉग का रैंक नहीं कर रहा है।

तो जब कभी हम ब्लॉग बनाते है तो सर्वप्रथम हमें हमारे ब्लॉग को जांचने वाले सर्च इंजन के विषय में जानकरी होनी आवश्यक होती है क्योंकि जब तक हम सर्च इंजन के कार्य प्रणाली को नहीं समझेंगे तब तक हम अपने ब्लॉग को सर्च इंजन के अनुकूल कैसे बना पाएंगे ?

विषय-सूची

सर्च इंजन क्या है ?

सर्च इंजन जैसा की नाम से पता चलता है; इंटरनेट में किसी भी प्रकार के तत्व को खोजने का एक उपकरण है, अर्थात आप  इंटरनेट के जरिए किसी भी चीज को खोजने के लिए जिस भी उपकरण का प्रयोग करते है वही सर्च इंजन कहलाता है, जैसे- गूगल, bing, naver, baidu इत्यादि। 

netmarketshare नामक एक कंपनी जो इंटरनेट में विभिन्न सर्वेक्षण के लिए प्रशिद्ध है,के अनुसार; विश्व भर के सभी प्रकार के किए जाने वाले search में 73% खोज Google द्वारा प्रायोजित है।

इसका अर्थ है कि विश्व में प्रत्येक 100 खोज में 73 खोज google के द्वारा किए जाते है, अर्थात गूगल ही आम जनता की पहली पसंद है यह कहना गलत नहीं होगा। 

तो हमें यदि अपने ब्लॉग का seo करना है तो सबसे पहले यह समझाना पड़ेगा कि गूगल की कार्य प्रणाली क्या है; विशेषकर भारत में तो गूगल ही सर्वाधिक प्रयोग किये जाने वाला सर्च इंजन है। 

तो आइए जानते है गूगल की कुछ साधारण कार्यप्रणाली को –

गूगल crawling करता है

शब्द crawling नए bloggers के लिए नया शब्द हो सकता है, परन्तु इस शब्द को समझना बहुत ही आसान है चलिए आपको एक उदाहरण से इसे समझाता हूँ,

सोचिए कि आपको अपने शहर से दूसरे अज्ञात शहर पर जाना है, आप कैसे जाएंगे? आप सबसे पहले अपने शहर से रोड के माध्यम से निकलेंगे और दूसरे शहर में पहुंचेंगे। फिर वह शहर से आप फिर दूसरे अज्ञात शहर के लिए निकलेंगे,और फिर दूसरे अज्ञात शहर से तीसरे इस प्रकार हर उस दूसरे शहर पर जाएंगे जो आपके लिए अज्ञात है। इस प्रकार आप हर संभव शहर को तलाश लेंगे। 

यदि हम रोड को backlink और शहरो को वेबपेज समझे तो बस इसी प्रकार गूगल crawler भी कार्य करता है।

तो गूगल सबसे पहले किसी साइट के एक वेबपेजे से crawl करना आरम्भ करता है, ये उस पेज में स्थित सभी लिंक को खोजता है और उसके माध्यम से दूसरे वेबपेज को भी crawl करता है,  फिर वह उस पेज के लिंक को खोजता है और उसे crawl करता है। इस प्रकार यह लगभग सम्पूर्ण वेब में उपस्थित पेज को crawl करता है

और गूगल यह सब करता कैसे है? इसका उत्तर है programming, जी हां गूगल प्रोग्रामिंग के माध्यम से crawl करता है। कुछ जगहों पर crawl शब्द के स्थान पर spider का भी इस्तेमाल किया जाता है। 

तो एक प्रकार से spider के काम को आसान करना ही seo करना कहलाता है।

गूगल indexing करता है

जब गूगल आपके वेबपेज को crawl कर लेता है उसके पश्चात वह पेज में उपस्थित सभी डाटा को अपने डेटाबेस या जिसे google database भी कहते है, में स्टोर करके रखता है, ताकि यह सर्च किये जाने पर दिखाई पड़े। 

यहां एक और बात कि गूगल crawler  वेबपेज को जिस प्रकार आप और हम देखते है वैसा नहीं देखता अपितु coding format में देखता है, तो indexing में हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना होता है कि गूगल crawlbot के द्वारा वैसा ही हमारे कंटेंट को ऐसा देखा जाए जिस प्रकार से वह हमें अपने आँखों से दिखाई देते है।

गूगल के लिए अपने ब्लॉग का SEO कैसे करे ?

तो हम देखते है की गूगल हमारे किसी भी ब्लॉग को समझने के लिए crawl और index करता है

तो search engine optimization का सामान्य अर्थ होगा कि हम किसी भी ब्लॉग पोस्ट को गूगल के पढ़ने के लिए सरल बना दे।

SEO को आसानी से समझने के लिए इसे तीन भागो में विभक्त किया जाता है, इन तीनो में से प्रत्येक का अपना स्वयं का गन होता है। तीनो के नाम क्रमशः on page seo, technical seo और off page seo है।

on page seo, SEO का एक प्रकार है जिसमे हम अपने website के भीतर के तत्वों को search engine के अनुकूल बनाते है इसका मुख्य उद्देश्य आपके site पर अधिक से अधिक organic traffic प्राप्त करना है| इसके जरिए search engine, जैसे google आसानी से समझ पाता है कि इस website में क्या है? यह किस विषय से संबंधित है? क्या इसमें दिए गए तत्व original है?

on page seo के विषय में अधिक जानकारी के लिए यह लेख पढ़े – on page seo in hindi

technical SEO,  किसी website को तकनीकी रूप से search engine के लिए optimize करना ही technical SEO कहलाता है|इसमें शामिल होते है- अपने website के loading speed को बढ़ाना, sarch engine को हमारे site पर आसानी से crawl करवाना,  sitemap, indexing करना इत्यादि|

technical  SEO के विषय में अधिक जानकारी के लिए यह लेख पढ़े – technical seo in hindi

और किसी website के बाहर से नाकि अंदर से, किया गया कोई भी प्रयास जिससे आपके SEO पर सकारात्मक प्रभाव आता हो, off page SEO कहलाता है| link building सबसे प्रमुख off page SEO होता है|

ऑफ पेज seo के विषय में अधिक जानकारी के लिए यह लेख पढ़े – off page seo in hindi

हालांकि उपरोक्त बताए गए सभी तथ्य प्रायोगिक कम और सैद्धांतिक अधिक लगते है, जबकि ब्लॉग्गिंग में सैद्धांतिक से अधिक प्रायोगिक ज्ञान की आवश्यकता अधिक होती है।

परन्तु चिंता करने की कोई बात नहीं है नीचे हम आपकोविभिन्न प्रकार के SEO करने के tips दे रहे है।

1. keyword research करे

कीवर्ड क्या होता है? सरलतम भाषा में कहा जाए तो यह वही शब्द है जिसे आप गूगल में खोजते है।

मिसाल के लिए जैसे आपने इस ब्लॉग तक आने से पहले “SEO kya hota hai” या “SEO in hindi” ऐसे वाक्यों का गूगल search किया होगा, इसे है कीवर्ड कहते है और जितने भी ब्लॉग उस search के जरिए आपको प्राप्त हुए होंगे वो सभी उस कीवर्ड पर आधारित होंगे।

Keyword से संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए यह लेख पढ़े – कीवर्ड क्या होता है ?

तो कीवर्ड के विषय में जानकारी मिल गई कि यह क्या होता है परन्तु अब बात आती है कीवर्ड research क्यों और कैसे करे।

कीवर्ड research क्यों करे – कीवर्ड research करने का सर्वप्रमुख उद्देश्य यह होता है कि अपने कंटेंट को सर्वाधिक खोज लिए जाने वाले शब्दों के निकट रखना अर्थात ऐसे शब्दों पर कंटेंट बनाना जिसकी मांग ज्यादा हो।

कीवर्ड रिसर्च कैसे करे – कीवर्ड research करने के लिए नीचे आपको कुछ उपयोगी tools बताए जा रहे है –

  1. गूगल कीवर्ड research planner tool (मुफ्त)
  2. Ubersuggest (मुफ्त)
  3. Google सुझाव (मुफ्त)
  4. Semrush (शुल्क)
  5. Ahrefs (शुल्क)
  6. Moz (शुल्क)

2. कीवर्ड का प्रयोग ब्लॉग में करे

कीवर्ड का प्रयोग आपको अपने ब्लॉग के विभिन्न स्थानों पर करना होता है क्योंकि कीवर्ड का उपयुक्त प्रयोग ही आपके ब्लॉग के विषय में गूगल bots को बताता है।

निम्न स्थानों पर विशेषकर अपने कीवर्ड को रखना चाहिए –

  1. अपने ब्लॉग के प्रथम paragraph में
  2. ब्लॉग के टाइटल में
  3. ब्लॉग के url में (slug में)
  4. ब्लॉग के विभिन्न headings (h1, h2, h3) मे
  5. ब्लॉग में प्रयोग किए गए इमेज के alt text में
  6. फोकस कीवर्ड के रूप में
  7. अपने snippet मे

अधिक जानकरी के लिए यह लेख पढ़े – कीवर्ड क्या होता है?

3. कीवर्ड stuffing से बचे

कीवर्ड का अपने ब्लॉग में उपयोग करने की भी अपनी एक सीमा होती है। हालांकि आपको यह पता चल गया है कि ब्लॉग में कीवर्ड का उपयोग करने से गूगल को crawl करने पर आसानी से समझ आ जाता है कि ब्लॉग किस विषय पर लिखा गया है।

परन्तु इसका यह अर्थ नहीं होता कि आप अपने पूरे पोस्ट में प्रयुक्त किए गए सभी शब्दों से भी अधिक उपयोग कीवर्ड का करे।

अर्थात अपने ब्लॉग में प्रयुक्त किए गए सामान्य शब्दों के अनुपात में यदि आपने अपने फोकस कीवर्ड को अधिक रख दिया है तो यही कीवर्ड स्टफिंग कहलाता है।

इससे बचने के लिए आपको अपने ब्लॉग पोस्ट पर सीमित कीवर्ड का प्रयोग करना चाहिए, सीमित का अर्थ यहां नगण्य से नहीं है अपितु उपयुक्त से है।

यद्यपि आप अगर वर्डप्रेस पर ब्लॉग बनाते है तो Yoast SEO नामक प्लगइन आपके काम को आसान कर सकता है।

4. उपयुक्त heading का प्रयोग करे

Heading आपके किसी भी paragraph की जान होती है। किसी लेख को यदि आपको पढ़ने दिया जाए तो सर्वप्रथम आप उसके टाइटल या heading से उस विषय के संदर्भ में अपनी राय बना लेते है उसके पश्चात ही उस विषय को आगे पढ़ने या ना पढ़ने का निर्णय करते है।

इसका अर्थ है कि किसी लेख को पढ़ने के लिए रूचि निर्धारित करने का कार्य heading करता है। तो स्वाभाविक है कि आप अपने लेख के heading को अधिक आकर्षित रखने के बारे में सोचेंगे क्योंकि इसी से अधिक पाठक आपके ब्लॉग के प्रति आकर्षित होंगे और जितने ज्यादा पाठक आपके ब्लॉग में आएंगे उतना ही आपका domain authority बढ़ेगा क्योंकि गूगल को यह लगेगा कि आपके ब्लॉग पर अधिक व्यक्ति आ रहे है तो जरूर यहां सटीक जानकारी मिलती होगी।

तो heading का यह एक प्रभाव है जो आपके SEO पर सीधा असर डालता है जो डोमेन authority से संबंधित है।

इसके अलावा heading किसी भी paragraph की शोभा बढ़ाते है।

5. कंटेंट की गुणवत्ता पर ध्यान दे

कंटेंट आपके SEO पर व्यापक प्रभाव डालता है। जब कभी आप कंटेंट बनाते है तो उसकी originality पर ध्यान देना आवश्यक हो जाता है क्योंकि गूगल bots कॉपी कंटेंट को बड़ी आसानी से समझ जाता है।

यदि आप स्वयं जांचना चाहते है कि आप जो लिख रहे है कहीं वैसा ही लेख किसी और ने तो नहीं लिखा है तो इसके लिए अनेकों tools आज इंटरनेट में मौजूद है। कुछ palgarism चेकर के नाम आपको नीचे दिए जा रहे है। इनके माध्यम से आप अपने कंटेंट की originality को जान सकते है –

  1. Google webmaster tool
  2. Unicheck
  3. Plagramme
  4. Grammarly
  5. Duplichecker

Content के विषय में अधिक जानकारी के लिए इस लेख को पढ़े – कंटेंट क्या होता है

6. कॉन्टेंट की मात्रा पर ध्यान दे

यदि आप कोई ब्लॉग लिखते है तो यह आवश्यक हो जाता है कि आप उस ब्लॉग के टाइटल पर संपूर्ण ज्ञान प्रदान करे,जिससे आपके ब्लॉग को पढ़ने के पश्चात पाठक के मन में उस विषय से संबंधित कोई भी सवाल ना बचे।

अपने ब्लॉग पर निष्पक्ष दलीलों को रखे कभी भी किसी भी लोभ में आ कर किसी भी उत्पाद का बेवजह तारीफ करना आपके पाठको पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में अपने कंटेंट में निष्पक्ष, तार्किक और सटीक बातो को ही विश्लेषणात्मक रूप में प्रकट करे।

कंटेंट के मात्रा का सीधा प्रभाव आपके SEO पर पड़ता है। कैसे? आइए जानते है।

जब आप किसी niche पर अपना ब्लॉग लिखते है तो आपको यह जांच लेना चाहिए कि उसी niche पर गूगल में उच्चतम पायदान पर उपस्थित ब्लॉग में कंटेंट की मात्रा कितनी है। क्योंकि उस विषय में विशेषज्ञ दिखने के लिए आपको या तो उस ब्लॉग के बराबर परंतु उससे अधिक गुणवत्ता वाला कंटेंट पेश करना पड़ेगा या तो आपको उससे अधिक मात्रा में कंटेंट को पेश करना पड़ेगा।

तो बेहतर तो यही है कि आप उससे अधिक मात्रा में कंटेंट पेश करे वह भी उच्च गुणवत्ता में।

इसके लिए आपको कंटेंट की मात्रा में बहुत अधिक ध्यान देना होगा और वह भी साफ सटीक कंटेंट।

7. Paragraph की लम्बाई पर ध्यान दे

जब आप किसी विषय पर लेख लिखते है तो सिर्फ लिखते जाते है, और लिखते जाते है? या ऐसा प्रयास करते है कि लेख पढ़ने वाले को आपका लेख अनुकूल लगे?

अवश्य ही आप पाठक को सोचकर लेख लिखते होंगे, क्योंकि आप अपने सवाल का उत्तर नहीं देते, आप पाठक के प्रश्नों का उत्तर देते है आप पाठक के हिसाब से ही उत्तर लिखेंगे।

तो प्रत्येक प्रश्न का उत्तर आप एक पैराग्राफ में दिखा सकते है। फिर अगले प्रश्न का उत्तर अगले पैराग्राफ में। इस प्रकार से आपके paragraph की शब्द सीमा भी तय हो जाती है और एक प्रश्न का उत्तर भी एक पैराग्राफ में मिल जाता है।

प्रत्येक पैराग्राफ का SEO में योगदान होता है। क्योंकि प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अपने आप में आकर्षक हो सकता है, जो किसी भी व्यक्ति को मात्र snippet में पढ़ने से उस ब्लॉग पर क्लिक करने के लिए आकर्षित कर सकता है

8. शब्द और वर्तनी पर ध्यान दे

अपने विद्यालयों के दिनों को याद कीजिए आप किसके notes को वरीयता देते थे? किसी ऐसे विद्यार्थी जिसे ई और इ का अंतर नहीं मालूम हो?

उत्तर अवश्य ही नहीं होगा। क्योंकि आपको भी पता है कि ऐसे व्यक्ति के notes से आपके शब्द और वर्तनी के ज्ञान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी प्रकार ब्लॉग के क्षेत्र में भी यही होता है।

आप उस लेख के प्रति अधिक आकर्षित होते है जो लेख में साफ स्पष्ट शब्दों का प्रयोग करता है। अर्थात शब्द और वर्तनी भी किसी ब्लॉग के SEO के रूप में कार्य करते है।

अपने लेखन में शब्द और वर्तनी में सुधार के लिए आप grammarly नामक गूगल एक्सटेंशन का प्रयोग कर सकते है।

अधिक जानकारी के लिए यह लेख पढ़े – क्वालिटी कंटेंट क्या होता है?

9. कोडिंग की सामान्य जानकारी रखे

ब्लॉगिंग के क्षेत्र में आपको कोडिंग की सामान्य समझ होनी अनिवार्य है यह आपको निम्न कार्यों में सहायता कर सकता hai-

  • unuseful कोड को हटाने में
  • जावास्क्रिप्ट, html, css जैसे कोडिंग को compress करने में
  • Webpage को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए
  • Webpage speed को बढ़ाने के लिए
  • Spam, hacking और अलग अलग प्रकार से आपके webpage पर किए जाने वाले अटैक से बचाने के लिए।

10. मोबाइल फ्रेंडली साइट बनाए

वर्तमान भारत में इंटरनेट का प्रयोग मोबाइल से करने वालो की तादाद लगभग 78% है ऐसे में यदि आप अपने ब्लॉग को मोबाइल फ्रैंडली नहीं बनाते है तो आप रेस से सीधे बाहर हो जाते है।

मोबाइल फ्रैंडली साइट का अर्थ होता है अपने साइट को मोबाइल के अनुकूल बनाना। इसमें सबसे बड़ा योगदान जावास्क्रिप्ट तथा इमेज resolution का होता है।

आप अपने साइट को से भी जांच सकते है कि यह मोबाइल फ्रैंडली है या नहीं। और अगर नहीं है तो इसका मूल कारण क्या है? कभी कभी थीम के भी मोबाइल फ्रैंडली नहीं होने की वजह से पूरा ब्लॉगिंग साइट ही मोबाइल फ्रैंडली नहीं हो पाता।

अपने साइट के मोबाइल फ्रेंडली होने की जांच करने हेतु गूगल द्वारा दिए गए टेस्ट किट पर जाए – google mobile friendly test

11. user friendly ब्लॉग बनाए

यूजर फ्रेंडली ब्लॉग से मतलब है आपके साइट पर आने वाले पाठक स्वयं से किसी भी चीज को खोजने में कितना सहजता महसूस करते है।

इसके लिए बेहतर है कि आप अपने ब्लॉग साइट पर सभी आवश्यक सामग्री को सामने में ही रखे जैसे मेनू बार , डिस्क्लेमर, about us, संपर्क, search bar, आवश्यक widgets इत्यादि।

इन सबको सम्मुख रखने से आपके पाठक आपके साइट को आसानी से समझ जाएंगे और किसी भी वस्तु या कंटेंट को खोजने में उनको समय नहीं लगेगा और यही यूजर फ्रेंडली साइट कहलाता है।

तो यूजर फ्रैंडली साइट बनाने पर आपके साइट के SEO पर सीधे असर पड़ेगा। क्योंकि साइट में यूजर की सहजता भी SEO का ही एक फैक्टर है।

12. वेबसाइट के लोड स्पीड पर ध्यान दे

वेबसाइट पेज स्पीड आपके साइट पर यूजर की स्थिति को निर्धारित करता है। Pagespeed का निर्धारण करने वाले अनेकों कारक होते है जिनमे निम्नलिखित तत्व शामिल होते hai-

  • इमेज की मात्रा
  • इमेज साइज
  • कोडिंग पैटर्न
  • Unuseful codings
  • अनावश्यक java, html, css codes
  • java, html, css codes का uncompressed version

इसके अतिरिक्त जब आप अपने पेज के loading speed को बढ़ाने जाते है तो आपको निम्न प्रमुख तत्वों पर ध्यान देने को कहा जाता है –

  • अपने largest contentful paint के आकार को छोटा करना
  • Cumulative layout shift को साइट visuality के लिए बेहतर बनाना।
  • इमेज को next generation पर अपलोड करें जैसे webp, jpeg2000 इत्यादि।

वेबसाइट के स्पीड की जांच के लिए इंटरनेट पर बहुत से tools उपलब्ध है जिनमे प्रमुख है –

13. crawlability पर ध्यान दे

जैसे कि आपको उपर में बताया गया है कि Google आपके ब्लॉग को crawl करता है इसके लिए आवश्यक है कि आप अपने साइट को crawlability के लिए सहज बनाए।

Crawlability के लिए सहज बनाने से आशय है कि आपके वेबसाइट को googlebots कितनी आसानी से पढ़ लेते है। आपके साइट में गूगल bots केवल कोड ही पढ़ सकते है, तो आप अपने webpage के कोड को जितना अधिक सरल और merge रखेंगे आपके साइट को crawl करने में bot को भी आसानी होगी।

तो कोड को compress करने और merge करने के लिए वर्डप्रेस में अनेकों plugins मौजूद है। जिनमे से कुछ मुख्य plugins के नाम मै आपको नीचे दे रहा हूं –

14. sitemap जमा करे

Crawlability के लिए सबसे बेहतर सुझाव होता है अपने साइट को गूगल या किसी भी search engine में सबमिट करना।

आपको अपने साइट का साइटमैप .xml के रूप में बनाकर इसे google search console में जमा करना होता है।

जब आप ऐसा करते है तो इसे google एक अनुमति के रूप में लेता है कि आपने अपने साइट को गूगल bot के लिए प्रस्तुत कर दिया है।

sitemap को जमा करने के लिए आपको google search console में जाना पड़ेगा। 

15. Dead link का रिपेयर करे

आपके स्वयं के साइट में कभी कभी कुछ लिंक ऐसे रहते है जो किसी पेज का url नहीं होता। ऐसा अधिकांश तब होता है जब आप किसी पेज (A) पर दूसरे पेज (B) का लिंक देते है और फिर पेज B का url तो बदल देते है परन्तु पेज A में पेज B का url पुराना है दिखता है।

ऐसे ही लिंक को dead link कहा जाता है। इनके repair के लिए आपको सभी पेज के link को चेक करने की जरूरत होती है।

16. Cononical पेज को पहचाने

Cononical पेज क्या होता है? कभी कभी हम देखते है कि किसी एक ही ब्लॉग पोस्ट का स्वयं के वेबसाइट में दो या अधिक कॉपी बन जाते है। ऐसे समय में हमें किसी एक पोस्ट को मूल मानकर अन्य को delete करना पड़ता है। इस मूल ब्लॉग पोस्ट को ही cononical page कहते है।

Cononical page एक मायने में किसी वेबसाइट का प्रमुख पेज होता है। इस पहचान पाना भी मुश्किल नहीं होता।

किसी एक ही ब्लॉग पेज के अलग अलग कॉपी का निर्माण हमारी छोटी छोटी गलतियों से ही होती है जैसे यदि आप वर्डप्रेस यूजर है तो हो सकता है आप लैपटॉप में किसी ब्लॉग के विषय में लिख रहे है फिर कुछ समय के लिए लैपटॉप को बंद कर मोबाइल app में उसी ब्लॉग को लिख रहे है तो ऐसी अवस्था में एक ही ब्लॉग पेज के दो version दिखाई देते है जिसमें एक लैपटॉप और दूसरा मोबाइल होता है।

ऐसे अवस्था से बचने के लिए आपको cononical पेज का निर्धारण करना पड़ता है।

17. साइट की सुरक्षा पर ध्यान दे

साइट की सुरक्षा आज के समय में सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य है। आपको अपने साइट को 24 घंटे लोगों के सम्मुख ओपन रखना है ऐसे में spammers और hackers के अटैक की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है, इससे सुरक्षा के लिए आपको निम्नलिखित विषयों पर ध्यान देना चाहिए।

  • सुरक्षित होस्टिंग साइट से service ले।
  • अपनी साइट में SSL की कड़ी अवश्य लगावे।
  • Cloud hosting prefer करे।
  • अपने वर्डप्रेस या जिस भी CMS ka आप use करते है, उसका पासवर्ड स्ट्रॉन्ग रखे और किसी को भी न बताए।
  • अपने guest blogger के विषय में अधिक से अधिक जानकारी एकत्रित करे।
  • साइट हैक होने पर तुरंत मेंटेनेंस mode पर switch करे।
  • अपने ब्राउज़र से cache और cookies को समय समय पर clear करते रहे।
  • लॉगिन अलर्ट जैसे plugins का उपयोग करे। (जैसे:- wordfence for wordpress)

18. अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉग पेज के सन्दर्भ में

यदि आपका website का content ऐसे भाषा से सम्बंधित है जो एक से अधिक देश में बोला जाता है तो ऐसे में search engine को यह दुविधा हो सकती है कि आपका website वास्तव में किस देश को सम्बोधित करेगा।

जैसे मान लीजिए आप हिंदी में लिखते है तो हमें पता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और यहां तक कनाडा और अमेरिका जैसे स्थानों में भी हिंदी बोला और समझा जाता है ऐसे में search engine को बता दिया जाए कि हम अमुक भाषा का इस्तेमाल कर रहे है और हमारा content अमुक देशो में दिखाया जाना चाहिए तो यह search engine के लिए आसान हो जाएगा।

Hreflang tags आपकी इस प्रकार की समस्या को दूर करता है। अधिक जानकारी के लिए इस लेख को पढ़े – टेक्निकल seo क्या होता है

19. लिंक build पर विशेष ध्यान दे

लिंक build करने का सीधा अर्थ बैकलिंक बनाने से है। आप अपने साइट का जितना अच्छा बैकलिंक बनाएंगे उतना ही organic traffic आपके साइट पर आपको प्राप्त होगा और SEO का प्रमुख उद्देश्य भी आपके साइट में ट्रैफिक की अधिकता करना होता है।

बैकलिंक से जुड़ी जानकारी आपको इस लेख में मिलेगी – बैकलिंक क्या होता है

20. आर्गेनिक ट्रैफिक को लक्ष्य बनाए

जैसा कि आपको ऊपर में बताया गया है कि organic traffic प्राप्त करना आपके बैकलिंक quality पर निर्भर करता है।

इसके अलावा विभिन्न स्रोतों जो कि अप्रत्यक्ष रूप से ट्रैफिक लाने से जुड़े हुए है उन के माध्यम से भी आप अपने साइट पर organic traffic पा सकते है जैसे – अपने niche से संबंधित जानकारी youtube जैसे प्लेटफार्म पर दे कर अथवा अपने niche से संबंधित इंटरव्यू में शामिल हो कर।

इंटरव्यू पर शामिल होने से आपके साइट पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि इससे आपके साइट के बारे में असीमित लोगो को पता चलता है जिससे लोग सीधे आपके साइट का नाम search मारते है और यह भी organic traffic का ही एक प्रकार है।

21. सही थीम का प्रयोग करे

आपके वेबसाइट की थीम user experience पर सीधे प्रभाव डालती है, यह तय करती है कि आपका साइट मार्केट में टिक सकता है या नहीं।

वैसे तो यदि आप वर्डप्रेस चलाते है तो आपको थीम के विषय में अनेकों विकल्प मिल जाएंगे। एक अच्छे ब्लॉगिंग साइट के लिए आपके niche के अनुसार आपको थीम का चयन करना चाहिए। जैसे टेक्निकल niche है तो आप दूसरे sites जो इसी niche से संबंधित हो के थीम को देखना चाहिए और उसी से मिलते जुलते थीम को एक्टिवेट करना चाहिए।

ब्लॉगिंग साइट के लिए वैसे किसी भी प्रकार के niche में newspaper, oceanwp या astra जैसे थीम काफी बेहतरीन होते है। इनका loading speed, light weight और drag and drop सुविधा इन्हे अन्य को तुलना में बहुत advance बनाते है।

22. सही plugins का प्रयोग करे

अपने साइट के बेहतर performance के लिए हमें कुछ विशेष प्रकार के बाहरी तत्वों की आवश्यकता होती है, फिर चाहे वो पेज कि loading speed बढ़ाना हो या अपने document के साइज को compress करना हो या इमेज को webp format में लाना हो इन सबके लिए आपको बाहरी मदद की आवश्यकता पड़ती है इसी कार्य को करने के लिए plugins का उपयोग किया जाता है।

परंतु Plugins हमारे साइट के performance में मददगार होते है इस सोच के चक्कर में यदि हम एक ही कार्य के लिए एक से अधिक प्लगइन को एक्टिवेट कर दे तो यहां द्वेष हो जाता है।

हमें plugins के चयन के समय बहुत सावधानी बरतनी होती है विशेषकर plugins को बार बार इंस्टाल/uninstall करने से अनावश्यक कोडिंग की मात्रा बढ़ जाती है, इसी प्रकार गलत plugins के इंस्टाल से आपके साइट पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अनावश्यक प्लगइन आपके साइट के seo को down कर सकता है।

23. मेनू बार, widgets तथा header और footer के विषय में

आपका साइट यूजर के लिए अनुकूल तभी होगा जब आप यूजर के लिए सभी आवश्यक तत्वों को उनके नजरो के सामने रखेंगे।

इस कार्य के लिए आप मेनू बार, widgets तथा header footer की सहायता ले सकते है। इसके माध्यम से आप अपने साइट से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियों को आसानी से लोगो के नजरो में प्रकट कर सकते है ।

ध्यान दीजिए आप जितना अपने साइट को लोगो के प्रति सुगम रखेंगे आपका SEO उतना ही बढ़ेगा।

24. कंटेंट को समय के साथ अपडेट करे

सोचिए आप किसी उत्पाद के विषय में लिखे है, बाद में उसी उत्पाद में कुछ नए features जुड़ जाते है परन्तु आप अपने कंटेंट में किसी प्रकार का अपडेट नहीं करते।

ऐसे outdated कंटेंट को कोई भी व्यक्ति वरीयता नहीं देगा, अर्थात आपके नियमित पाठक भी इस लेख को पुनः पढ़ने नहीं आएंगे। जब पुराने पाठक ही बिछड़ना आरंभ कर दे तो नए पाठकों से अधिक आशा रखना मूर्खता ही होगा।

इससे बचने के लिए आप अपने लेखों को हफ्ते में एक बार अवश्य revise करे, और उससे संबंधित विषयों के बारे में रिसर्च करे ताकि आप किसी भी प्रकार के अपडेट को ना miss कर दे।

25. इमेज की नवीन formats पर ध्यान दे

Iamge की नवीन फॉर्मेट से मतलब इमेज compression और presentation के बेहतरीन तरीके से है।

अब तक हमने इमेज के png, jpg, jpeg इत्यादि formats के विषय में जाना है, परंतु आधुनिक समय में WebP, jpeg2000 इत्यादि प्रचलित formats है।

इन formats को चुनने का सबसे मुख्य कारण यह है कि इसमें इमेज क्वालिटी में किसी प्रकार की कोई भी कमी नहीं आती जबकि इमेज लगभग 80% छोटा होता है। मै भी अपने सभी ब्लॉग्स में WebP format को ही prefer करता हूं। यदि किसी कारणवश WebP format नहीं use करता हूं तो jpeg form को चुनता हूं। क्योंकि jpeg, png format के तुलना में अधिक छोटा होता है।

इमेज क्वालिटी का आपके SEO पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। क्योंकि यह सीधे- सीधे पेज लोड पर प्रभाव डालता है।

26. इमेज की लोड टाइम पर ध्यान दे

जैसा कि आपको ऊपर बताया गया है यदि इमेज सही फॉर्मेट, resolution और साइज का नहीं होता है तो पेज को लोड होने में अधिक समय लगता है।

कोई भी search engine उसी वेबपेज को वरीयता देता है जो जल्दी खुलता हो। अतः इमेज pagespeed के खेल में अहम भूमिका अदा करता है।

27. इमेज कम्प्रेशन पर ध्यान दे

Iamge compress करने से आशय है अपने इमेज के भार (kilobytes में) को कम रखे परंतु यहां इस बात को अवश्य ध्यान में रखे कि इमेज को छोटा करने के चक्कर में आप उसकी गुणवत्ता ना खो दे।

इमेज compression के lie wordpress में बहुत से plugins मौजूद है जिसमें प्रमुख है – resmush, smush, shortpixel इत्यादि।

28. breadcrumb बनाए

Breadcrumb का अर्थ मौजूदा पेज में उस पेज तक पहुंच पाने का रास्ता दिखाना होता है। अर्थात आप इस ब्लॉग को पढ़ने के लिए सबसे पहले साइट के होमपेज पर गए फिर category select किए और तब इस लेख तक पहुंचे।

जब आप अपने साइट पर breadcrumb रखते है तो आप लोगो को दिखाते है कि वे आपके ब्लॉग साइट में कहां पर स्थित है और इसके अलावा वे और किन किन category को पढ़ सकते है। यदि आप किसी जगह पर map के साथ जाते है तो आपको वापिस आने में अधिक कष्ट उठाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। Breadcrumb का भी यही कार्य होता है।

29. crawl पेज और वास्तविक पेज पर समानता लाए

हम जानते है कि गूगल bots हमारे लेख को अलग तरीके से पढ़ते है, उनके लिए यह सब कोड होता है इन कोड को पढ़ना है crawl कहलाता है। जबकि हमें यह एक लेख की तरह दिखाई देता है।

तो हम जिस चीज को वेब पेज समझ कर पढ़ते है और उसके पीछे के कोडिंग जिसे गूगल crawler पढ़ता है, उनके मध्य में कम से कम फासला रखना होता है अर्थात हमें कोडिंग और वास्तविक पेज में सामंजस्य बनाए रखना आवश्यक है। ऐसा क्यों?

क्योंकि कभी कभी कुछ कोड इतने पेचीदा और गलत होते है कि ये पेज की लोड स्पीड को बढ़ाते है। जिसके कारण हमरे SEO पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 

30. साइट पर आवश्यक पेज को जोड़े

आवश्यक पेज का अर्थ है अपने साइट पर about us, contact, Privacy policy इत्यादि पेज को अवश्य रखे, यह हमारे website को अधिक भरोसेमंद और reliable बताता है। जिसके कारण search engine की उस वेबसाइट पर निर्भरता बढ़ती है और इस कारण आपका SEO भी अनुकूल होता है।

अंतिम शब्द

आज हमने seo in hindi लेख में SEO par प्रभाव डालने वाले 30 कारकों पर ध्यान केंद्रित किया।

यद्यपि yoast SEO नामक प्लगइन के प्रयोग से आप काफी हद तक अपने पेज का seo कर सकते है, परंतु फिर भी उपरोक्त 30 बिंदुओं का ज्ञान होना आपके लिए बहुत आवश्यक है।

आशा करता हूं कि आपको यह लेख पसंद आया होगा, हमें comment करके इस लेख के विषय में अपने अनुभव साझा करे

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