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IMPS क्या है ? IMPS का प्रयोग कैसे करते है ? IMPS के लाभ और हानि क्या है ?

IMPS क्या है

क्या आप जानते हैं कि IMPS क्या होता है ? इस लेख के माध्यम से आज हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे कि आखिर यह IMPS होता क्या है और इसकी कार्यप्रणाली कैसी होती है।

वर्तमान समय में व्यक्ति प्रतिदिन किसी न किसी प्रकार से बैंकिंग सेवा का लाभ उठाता ही है। फिर चाहे वह लोन है या सामान्य ट्रांजैक्शन हो, अथवा सब्सिडी (सरकार के द्वारा दिया जाने वाली अनुदान की राशि) हो। वास्तव में आज हर नागरिक किसी ना किसी प्रकार से स्वयं को बैंकिंग व्यवस्था के मायाजाल में फंसा हुआ पाता है। 

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बैंकिंग व्यवस्था की सेवाओं में तीव्रता के चलते पिछले कुछ वर्षों से भारत में लेन-देन की सीमा में काफी इजाफा हुआ है। लेनदेन की सीमा के साथ-साथ लोगों के लेन-देन के तरीकों में भी बदलाव हुआ है। अब जहां लोगों ने बैंकिंग लेनदेन के लिए पुरानी डॉक्यूमेंटल विधि को लगभग त्याग दिया है और उसका स्थान अब ऑनलाइन बैंकिंग ने ले लिया है।

ऑनलाइन बैंकिंग या डिजिटल बैंकिंग के जमाने में आपको कुछ नाम विशेषकर सुनाई देते हैं जो कि निम्नलिखित हो सकते हैं – IMPS, RTGS, NEFT, BHIM, UPI इत्यादि।

उपरोक्त दिए गए नामों में से कुछ नामों को तो आप जानते भी होंगे परंतु हो सकता है कुछ नामों से आप अनभिज्ञ हो या केवल सुना हो, लेकिन उसका अर्थ नहीं जानते। बैंकिंग प्रणाली से जुड़े शब्दों को व्याख्या करने के सिलसिले में आज हम IMPS क्या होता है यह जानेंगे।

इस डिजिटल दुनिया में हमें अपने दैनिक कार्यों से संबंधित शब्दों के विषय में जानकारी रखनी आवश्यक होती है क्योंकि ऐसा न करने से यह हमारे प्रतिदिन के कार्य में बाधा ला सकती हैं। तो आइए बिना विलंब किए जानते है कि आखिर यह IMPS होता क्या है ?

विषय-सूची

IMPS क्या होता है ? What is IMPS in Hindi

IMPS वास्तव में बैंकिंग लेनदेन का एक संक्षिप्त नाम है। इसका पूरा नाम Immediate Payment Service है। जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, यह त्वरित (Immediate) रूप से भुगतान (Payment) करने वाली सेवा (service) है। इसे इंस्टेंट इंटरबैंक फंड ट्रांसफर सर्विस भी कहा जाता है।

अब आपके दिमाग में यह विचार आ रहा होगा कि सामान्य बैंकिंग लेनदेन, जो कि हम बैंक में जाकर फॉर्म भर कर करते है वह भी तो त्वरित रूप से ही होता है, तो ऐसे में IMPS इससे अलग प्रकार की सेवा कैसे है?

आपके मन में यह प्रश्न आना वाजिब है। इसका उत्तर भी स्पष्ट और काफी रोचक है। जब कभी आप बैंक पर जाकर जमा या निकासी वाले फॉर्म के माध्यम से पैसे निकालने या जमा करने का प्रयास करते हैं तो वास्तव में उस वक्त आप ऑफलाइन मोड से पैसे निकालने का प्रयास कर रहे होते हैं क्योंकि यहां पर आपके और बैंक के मध्य कोई तीसरी वस्तु नहीं होती है और इस कारण आपको बैंक में जाकर सीधे रुपए के नोट्स को जमा कराना या प्राप्ति होती है।

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वही जब आप IMPS जैसे प्रणाली का प्रयोग बैंकिंग सेवा के लिए करते हैं तो यहां पर आपको एक डिजिटल माध्यम की आवश्यकता होती है जो कि मोबाइल भी हो सकता है या फिर लैपटॉप अथवा कंप्यूटर भी। साथी डिजिटल होने के कारण इसे ऑनलाइन मोड बैंकिंग भी कहा जाता है और इसे आप किसी भी स्थान से 24 * 7 अर्थात प्रत्येक क्षण में कर सकते हैं।

वास्तव में IMPS की सबसे खास बात यह है कि इसे हम वास्तविक समय में किसी भी क्षण में क्रियान्वयन कर सकते हैं इसका अर्थ यह होता है कि अब बैंकिंग आपके लिए सदैव लाइव (live) रहेगा। साथ ही इसके माध्यम से आप बैंक जाए बिना भी बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं और यह भी एक कारण है कि इसे इंस्टेंट इंटरबैंक फंड ट्रांसफर सर्विस भी कहा जाता है। 

IMPS का इतिहास क्या है ? History of IMPS in Hindi

वास्तविक मुद्रा को 24 * 7 प्रदान करना एक बड़ा ही जटिल कार्य था क्योंकि एक तो अब तक स्वयं सरकार को डिजिटल मुद्रा के विषय में कोई जानकारी नहीं थी दूसरी ओर आम जनता भी इस जीत से अनभिज्ञ था।

ऐसे में NPCI (नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) ने वर्ष 2010 को एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम किया जिसका नाम IMPS प्रोजेक्ट नाम रखा गया। 

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इस प्रोजेक्ट में भारत के सबसे विशाल बैंक समूह SBI के साथ साथ कुछ अन्य बैंक जैसे बैंक ऑफ इंडिया यूको बैंक यस बैंक और HDFC बैंक ने काम किया। प्रोजेक्ट उसी वर्ष से एक बेहतरीन परिणाम देने लगा था अंततः यह माना गया कि यह प्रोजेक्ट सक्सेस है, और वर्तमान समय में हम IMPS को भुगतान की एक विशिष्ट प्रणाली के तौर पर भारत वर्ष में देख सकते हैं।

IMPS काम कैसे करता है ?

IMPS अत्यंत तीव्र गति और वर्तमान समय में मुद्रा ट्रांसफर के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला एक आधुनिक डिजिटल विधि है, जिसमे मोबाइल, इंटरनेट, एटीएम, एसएमएस इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। 

डिजिटल माध्यम होने की वजह से IMPS संपूर्ण भारत के भीतर एक ही क्षण में लाखों रुपए एक बैंक से दूसरे बैंक अकाउंट पर ट्रांसफर करने हेतु प्रयुक्त किया जाने वाला एक व्यवसायिक और सुविधाजनक व्यवस्था बन चुका है।

IMPS के कार्य करने की प्रणाली भी बहुत आसान है। IMPS के माध्यम से मुद्रा ट्रांसफर करने हेतु सबसे पहले beneficiary set करना होता है। अर्थात यहां कस्टमर को सभी मुख्य जानकारियों को भरना करना होता है जैसे कि – नाम, बैंक अकाउंट नंबर, IFSC कोड, MMID नंबर इत्यादि। 

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एक बार beneficiary add हो जाने के बाद आपको 30 मिनट के भीतर भुगतान करना होता है अन्यथा beneficiary स्वतः भुगतान वाले लिस्ट से हट जाता है।

IMPS के उद्देश्य क्या है? Aim of IMPS in Hindi

वैसे तो IMPS अपने हाई स्पीड और 24 * 7 लाइव फंड ट्रांसफर हेतु विख्यात है तथा तीव्र डिजिटल मुद्रा हस्तांतरण के लिए जाना जाता है। परंतु फिर भी इसके उद्देश्य को निम्नलिखित भागों में विस्तार दिया गया है –

  1. अधिक से अधिक ग्राहकों को उनके सुविधा हेतु बैंक की लेनदेन संपूर्ण रुप से मोबाइल के माध्यम से करने हेतु प्रेरित करना।
  2. पेमेंट या भुगतान की विधि को अत्यधिक सरल बनाने हेतु केवल मोबाइल के प्रयोग तक सीमित करना।
  3. आरबीआई के मुख्य उद्देश्य के अनुसार जनहित हेतु मुद्रा का डिजिटलीकरण करना।
  4. मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग को साफ सुथरा और सुरक्षित परी कैसे पूर्ण करना।
  5. भारत को पूर्ण रूप से मोबाइल बैंकिंग सुविधा के लिए तैयार करना।

IMPS के द्वारा पैसों का ट्रांसफर कैसे करे ?

वैसे तो IMPS के माध्यम से पैसा ट्रांसफर करना एक सुरक्षित एवं तत्कालिक माध्यम है परंतु इसके माध्यम से भी भुगतान बहुत सारे विकल्पों के माध्यम से पूर्ण किया जा सकता है। 

एक बात पर आप ध्यान रखें कि जब कभी भी आप आइएमपीएस के माध्यम से मुद्रा का स्थानांतरण करते हैं तो आपको हमेशा सबसे पहले beneficiary add करना होता है।

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यह beneficiary कुछ और नहीं अपितु आप के माध्यम से जिस व्यक्ति को या संस्थान जिसे आप पैसा भेजने वाले हैं, का ब्यौरा (detail) होता है। तो इस डिटेल में मुख्य रूप से आपके कस्टमर का बैंक अकाउंट नंबर, IFSC कोड, बैंक ब्रांच नेम, मोबाइल नंबर इत्यादि हो सकते है।

निम्न पांच माध्यमों से हम आसानी से IMPS के माध्यम से पैसों का ट्रांसफर कर सकते हैं –

  1. मोबाइल नंबर + MMID (P2P विधि)
  2. Bank account number + IFSC (P2A विधि)
  3. Mobile number +ATM 
  4. Card + ATM pin
  5. User ID + Internet banking password

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आइए अब एक-एक करके इन पांचों तरीकों का विस्तारपूर्वक वर्णन देखते हैं –

#1. मोबाइल नंबर और MMID के माध्यम से IMPS पर पैसे कैसे ट्रांसफर करे ? ( P2P विधि क्या है?)

भारत सरकार द्वारा उपलब्ध IMPS सेवा भारतीय लोगों के लिए 24 * 7 लाइव बैंकिंग करने हेतु एक बेहतरीन विकल्प है जिससे हम किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से उपयोग करते हुए पर्सन टू पर्सन (P2P) या पर्सन टू अकाउंट (P2A) या पर्सन टू संस्थान में प्रेषित कर सकते हैं।

यह एक ऐसा माध्यम है जो अपने कार्य को एक सुरक्षित तथा इंक्रिप्टेड माध्यम से सिर्फ कुछ चंद सेकंड में पूर्ण करता है। यहां तक कि आप इसके द्वारा ₹1 से लेकर लाखों रुपए तक ट्रांजैक्शन एक समय पर कर सकते हैं।

मोबाइल नंबर और MMID से IMPS का प्रयोग करने हेतु सबसे पहले प्रेषक (sender) और ग्राही (reciever) दोनों को ही अपना मोबाइल नंबर अपने अपने बैंक अकाउंट से लिंक किया होना चाहिए। इसके साथ ही बैंक द्वारा प्रदान किया गया एक unique ID code जिसे “MMID” भी कहा जाता है, वह भी आपके पास मौजूद होना चाहिए तभी आप इस विधि का प्रयोग कर सकते है।

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अब आप सोच रहे होंगे कि यह MMID होता क्या है? MMID या जिसका full form :-  Mobile Money Identifier होता है। वास्तव में MMID बैंक के द्वारा प्रदान किए जाने वाला 7 अंको वाला एक unique code होता है। यूनिक होने का अर्थ है कि यह प्रत्येक ग्राहक का एक व्यक्तिगत रूप से निश्चित एवं सबसे भिन्न कोड होता है। इस प्रकार प्रत्येक MMID नंबर एक unique mobile number से जुड़ा होता है। हालांकि 1 मोबाइल नंबर से अनेक MMID नंबर जोड़े जा सकते है। 

MMID कैसे जनरेट करे? इसकी जानकारी इस लेख में सबसे नीचे खंड में पेश की गई हैं।

तो कोई भी व्यक्ति जो इस विधि के माध्यम से लेनदेन करना चाहता है तो उसे अपने ग्राही या जिसे beneficiary भी कहा जाता है, का मोबाइल नंबर और ऊपर दिए गए MMID नंबर की जानकारी होनी चाहिए। 

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इसके पश्चात बैंक के एप्लीकेशन या वेब पेज पर पूछे गए स्थान पर अपने beneficiary का मोबाइल नंबर और MMID नंबर दर्ज करना चाहिए और साथ ही यहां पर आपसे “कितनी रकम भेजनी है (Amount to be transferred)” के बारे में भी पूछा जाता है, इसमें आपके द्वारा भेजी जाने वाली रकम को अंक एवं शब्द दोनों ही फॉर्मेट में दर्ज किया जाना चाहिए।

#2. Bank account number और IFSC के माध्यम से IMPS पर पैसा कैसे ट्रांसफर करे? (P2A विधि क्या है?)

जैसे कि उपरोक्त विधि में आपने देखा कि किसी पर ट्रांसफर के लिए आपको सामने वाले व्यक्ति का मोबाइल नंबर और MMID नंबर ज्ञात होना आवश्यक होता है। परंतु ऐसी भी बहुत सी स्थितियां निर्मित होती है। जिसमें हमें सामने वाले व्यक्ति या जिसे beneficiary कहा जाता है उसका मोबाइल नंबर ज्ञात नही होता है।

इसके अलावा भी कभी कभी ऐसी स्थितियां निर्मित होती है जिसमें आपका तो मोबाइल बैंक अकाउंट से लिंक होता है परंतु हमने वाले beneficiary का मोबाइल नंबर बैंक अकाउंट से रजिस्टर नहीं होता है। इस स्थिति में आप अपने beneficiary को उसके मोबाइल नंबर के माध्यम से मनचाहा रकम ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं।

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ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही IMPS के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने के लिए एक अन्य विकल्प तैयार है। जिसके अनुसार आपको beneficiary के मोबाइल नंबर की आवश्यकता नहीं रहती।

परंतु इस P2A विधि जिसे person to account method भी कहा जाता है, से रकम ट्रांसफर करने के लिए आपको अपने beneficiary का बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड ज्ञात होना चाहिए।

अब आप सोच रहे होंगे कि यह IFSC कोड क्या होता है? वास्तव में कोई IFSC code जिसका full form Indian Financial System Code होता है वह 11 अंको का एक अल्फान्यूमैरिक (alphabet+numeric) नंबर होता है जो विशिष्ट रूप से किसी बैंक के विशेष ब्रांच के लिए होता है।

तो जब आप अपने beneficiary का बैंक का अकाउंट नंबर (खाता संख्या) और IFSC code को जानते हैं तो इन दोनों के माध्यम से भी आप आइएमपीएस के द्वारा रकम ट्रांसफर कर सकते हैं।

#3. मोबाइल नंबर और MPIN के माध्यम से IMPS द्वारा पैसे ट्रांसफर करे (Mobile + MPIN method)

IMPS में MPIN और मोबाइल नंबर के माध्यम से भी पैसों का लेनदेन किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले आपके पास MPIN होना आवश्यक होता है। यह वास्तव में 4 अंकों का एक यूनिक कोड होता है जिसे आप आसानी से अपने बैंक के होम ब्रांच से जनरेट कर सकते है।

MPIN का full form :- Mobile Banking Personal Identification Number होता है।

यह मुख्य रूप से आपके मोबाइल पर आपके बैंक के पासवर्ड के रूप में कार्य करता है। अर्थात आप जब कभी भी अपने मोबाइल के माध्यम से अपने बैंक अकाउंट को खोलने का प्रयास करेंगे तो इस पर या MPIN में डालने की आवश्यकता होती है।

MPIN कैसे जनरेट करे? इस विषय में जानकारी इस लेख के सबसे नीचे खंड में प्रस्तुत की गई है।

तो अब आप आसानी से अपने मोबाइल और रेट MP3 के माध्यम से आइएमपीएस सुविधा ले सकते हैं। इसे करने के लिए सबसे पहले आपको अपने MPIN के माध्यम से अपना बैंकिंग ऐप खोलने की आवश्यकता होती है जिसके पश्चात beneficiary को add करके वही प्रक्रिया को पूर्ण करना होता है जैसा कि ऊपर बताया गया है।

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अंत में आपको beneficiary के डिटेल के रूप में उसका मोबाइल नंबर डालना होता है। जिसके पश्चात आपको आपके द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि को डालना पड़ता है और जैसे ही आप आगे बढ़ते हैं तो बैंकिंग एप्प आपसे आपके ट्रांजैक्शन के लिए MPIN की मांग करता है।

तो जैसे ही आप उस MPIN को डालते हैं तो आपके अकाउंट से पैसा आपके beneficiary के अकाउंट पर ट्रांसफर हो जाता हैं।

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#4. ATM card और ATM PIN के माध्यम से IMPS द्वारा पैसे कैसे ट्रांसफर करें  (ATM + PIN method)

यदि आपका मोबाइल नंबर आपके बैंक अकाउंट से लिंक नहीं है और तो भी आप IMPS सेवा का लाभ उठाना चाहते हैं तो ऐसी स्थिति में भी भारत सरकार ने आपको कुछ प्रक्रियाएं दी हुई है जिसके माध्यम से आप IMPS सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

जिस भी व्यक्ति का बैंक अकाउंट होता है वर्तमान समय में उन सभी के पास अपना अपना ATM कार्ड भी होता है। और अगर आपके पास ATM कार्ड है तो आप ATM पिन के विषय में भी जानते होंगे। 

आप सभी को यह बात ज्ञात है कि ATM कांड और ATM पिन दोनों ही ATM मशीन से पैसे निकालने के लिए काम आते हैं। जब कभी आप ATM मशीन पर जाते हैं तो वहां सबसे पहले आपको अपनी ATM कार्ड को मशीन में इंसर्ट करना होता है जिसके बाद मशीन आपसे एक प्रक्रिया के अनुसार ATM PIN मांगती है। इस PIN को जो कि 4 नंबर का होता है, आप अपने अकाउंट से पैसे का निकासी या जमा कर सकते हैं।

 तो एटीएम एक ऐसी सुविधा प्रदान करता है जिसके माध्यम से आप बिना बैंक जाए केवल एटीएम मशीन के माध्यम से पैसे जमा कर सकते है या निकाल सकते हैं।

परंतु क्या आपको ज्ञात है कि आप ATM कार्ड और ATM पिन की सहायता से IMPS सेवा का भी लाभ उठा सकते हैं।

IMPS सेवा का लाभ उठाने के लिए आपको अपना एटीएम कार्ड के डिटेल के बारे में अवगत होना चाहिए। 

जब कभी भी आप ATM के माध्यम से IMPS सेवा का लाभ ATM कार्ड के माध्यम से उठाते हैं तो आपको अपने ATM कार्ड का नंबर और उसका CVV नंबर ज्ञात होना चाहिए और साथ ही आपका एटीएम का चार अंको का पिन भी आपको पता होना चाहिए।

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आप जहां से भी इस विधि के माध्यम से भुगतान करने का प्रयास करते हैं वहां आपको एटीएम से संबंधित सभी प्रकार के डिटेल्स को पूछा जाता है अतः आपको उपरोक्त दिए गए ATM से संबंधित सभी डिटेल्स चाहत होंगे तभी आप इस सुविधा का लाभ उठा पाएंगे।

#5. User ID और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या ट्रांजैक्शन पासवर्ड के माध्यम से IMPS सेवा का लाभ कैसे उठाएं?

कभी-कभी ऐसी स्थितियां में निर्मित होती है जिसके माध्यम से आप मोबाइल बैंकिंग या एटीएम के माध्यम से IMPS सेवा का लाभ नहीं उठा पाते हैं। इसके कारण कुछ भी हो सकता है शायद हो सकता है आपके पास आपका मोबाइल उस वक्त मौजूद ना हो जिस वक्त आप तो ट्रांजैक्शन करना चाहते हैं या फिर आपके पास उस समय अपना एटीएम मौजूद में हो ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे?

भारत सरकार ने ऐसी स्थिति मैं भी आपके भुगतान कौन नहीं रुकने हेतु कुछ कदम उठाए हैं तथा ताप इन परिस्थितियों पर भी IMPS सेवा का लाभ उठा सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपकी मदद इंटरनेट बैंकिंग कर सकती है।

इंटरनेट बैंकिंग कुछ और नहीं अपितु इंटरनेट के माध्यम से बैंकिंग सेवा का लाभ उठाना होता है। जिन भी व्यक्ति को यह नहीं मालूम कि इंटरनेट बैंकिंग की प्रक्रिया क्या होती है उन्हें हम बता दें कि इंटरनेट बैंकिंग करने के लिए सबसे पहले आपको अपने बैंक के ब्रांच पर जाकर इंटरनेट बैंकिंग के लिए आवेदन अप्लाई करना होता है।

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हालांकि यह कार्य आजकल ऑनलाइन भी होने लग गया है अर्थात अब तो आप घर बैठे भी इंटरनेट बैंकिंग के लिए अपने बैंक के वेबसाइट से आवेदन कर सकते हैं। इस आवेदन को पूर्ण करते ही आपको एक यूजर आईडी प्राप्त होता है, जिस प्रकार फेसबुक इंस्टाग्राम कहां user-id होता है उसी प्रकार आपके इंटरनेट बैंकिंग कभी एक यूजर आईडी इस प्रकार से बन जाता है।

अब यदि आपका user-id निर्मित हो चुका है तो साथ में उसका एक login पासवर्ड भी निर्मित होता है। इसके साथ ही आपको एक और पासवर्ड प्राप्त होता है जो कि ट्रांजैक्शन पासवर्ड कहलाता है। इन दोनो पासवर्ड का अपना अपना कार्य और अपना अपना महत्व है।

लॉगइन पासवर्ड के माध्यम से आप अपने इंटरनेट बैंकिंग की टेस्ट बोर्ड तक पहुंच पाते हैं और ट्रांजैक्शन पासवर्ड की सहायता से आप किसी भी ट्रांजैक्शन को इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से पूरा कर पाते हैं।

तो यदि आपके पास अपना इंटरनेट बैंकिंग का यूजर आईडी और लॉगिन और ट्रांजेक्शन पासवर्ड यह सब है तो भी आप आइएमपीएस सेवा का सुविधा ले सकते हैं। बस आपको पेमेंट के लिए इंटरनेट बैंकिंग के विकल्प को चुनना होगा उसके बाद आपसे आपके इंटरनेट बैंकिंग के डिटेल पूछे जाएंगे जिन्हें आप सही भरकर आगे भुगतान की प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं।

IMPS में भुगतान की सीमा क्या है ? (Limit of IMPS in hindi)

    Mobile Banking  Net Banking
Account Nu + IFSCMobile Nu + MMIDAccount Nu + IFSCMobile Nu + MMID
     1₹ – 5 लाख ₹    1₹ – 10 हज़ार ₹     1₹ – 5 लाख ₹    1₹ – 10 हज़ार ₹

हालांकि उपरोक्त सीमा समय समय पर परिवर्तित होते रहते है। साथ ही उपरोक्त के डाटा भिन्न भिन्न बैंको के लिए भिन्न भिन्न है। 

क्या IMPS से भुगतान पर कोई शुल्क लगता है ?

IMPS सेवा का लुत्फ उठाने के लिए आपको कुछ चार्जर्स भी देना पड़ता है अर्थात आप जितने बार IMPS सेवा के माध्यम से भुगतान करेंगे उतने बार आपको प्रत्येक बैंक द्वारा कुछ नियमित दरों पर ट्रांजैक्शन चार्जेस लगाए जाते हैं।

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नीचे हम भारत के कुछ चुनिंदा एवं मशहूर बैंकों के द्वारा IMPS सेवा पर भुगतान करने हेतु लगाने वाले शुल्क का ब्यौरा दे रहे हैं –

बैंक का नाम 

IMPS transaction शुल्क

 (2 लाख ₹ तक के लिए) 

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया 

NIL

कैनरा बैंक 

15 ₹ + GST

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया 

15 ₹ + GST

बैंक ऑफ़ इंडिया 

5 ₹ + GST

यूको बैंक 

14.41 ₹ + GST

पंजाब नेशनल बैंक 

5 ₹ + GST

एक्सिस बैंक 

15 ₹ + GST

induslnd बैंक 

15 ₹ + GST

ICICI बैंक

15 ₹ + GST

HDFC बैंक 

15 ₹ + GST

बैंक ऑफ़ बड़ौदा 

5.50 ₹ + GST

सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया 

5 ₹ + GST

इंडियन ओवरसीज़ बैंक 

15 ₹ + GST

बंधन बैंक 

15 ₹ + GST

IDFC बैंक 

NIL 

IDBI बैंक 

15 ₹ + GST

कोटक महिंद्रा बैंक 

NIL

यस बैंक 

5 ₹ + GST

फ़ेडरल बैंक 

15 ₹ + GST

साउथ इंडियन बैंक 

15 ₹ + GST

IMPS के मुख्य विशेषताएं क्या है ? IMPS feautres in hindi

  1. IMPS एक 24*7*365 सदैव भुगतान के लिए उपलब्ध सेवा है –
  2. IMPS पर भुगतान के विभिन्न मोड उपलब्ध है
  3. IMPS में भुगतान की स्पीड त्वरित होती है 
  4. IMPS सेवा में Security का पूरा ख्याल रखा जाता है
  5. IMPS की ट्रांसफर लिमिट fraud से सुरक्षा प्रदान करता है
  6. IMPS के अनुप्रयोग असीमित है। 

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IMPS के लाभ क्या है ?

  1. त्वरित भुगतान
  2. 365 * 24 * 7 भुगतान हेतु उपलब्ध
  3. लंदन हेतु सुरक्षित
  4. भुगतान प्राप्त करना एवं प्रेषित करना दोनों ही बहुत सरल।
  5. प्रभावी लागत (cost effective)
  6. मोबाइल इंटरनेट और ATM तीनों के लिए उपलब्ध
  7. भुगतान के लिए बहुत सारे विकल्प उपलब्ध है जैसे – MMID, इंटरनेट बैंकिंग, MPIN, ATM, IFSC इत्यादि।

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IMPS की कमियां क्या है ?

IMPS की कमियां निम्नलिखित है –

  1. विभिन्न बैंकों के लिए ट्रांजैक्शन की दर और टैक्स भिन्न भिन्न है।
  2. वे व्यक्ति जो टेक्नॉलजी से ज्यादा परिचित नहीं है और मोबाइल का प्रयोग केवल कॉल करने इत्यादि के लिए करते हैं उनके लिए यह सुविधा लाभकारी नहीं है।
  3. UPI और अन्य बैंकिंग method इसके एक प्रबल विकल्प के रूप में आम जनता के लिए उपलब्ध है।
  4. कभी कभी Benficiary जोड़ना एक जटिल प्रक्रिया बन जाती है।
  5. Benficiary के प्रमाणीकरण हेतु कोई विकल्प मौजूद नहीं होता है।
  6. ट्रांजैक्शन की maximum लिमिट 5 लाख ₹ तय है। (अलग-अलग बैंकों में यह लिमिट अलग-अलग है)

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IMPS, NEFT और RTGS  में क्या अंतर है ? IMPS vs NEFT vs RTGS in hindi

IMPS, NEFT और RTGS के मध्य के अंतर को स्पष्ट रूप से समझने के लिए सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि NEFT क्या होता है।

क्योंकि हम IMPS के विषय में पहले से जानकारी प्राप्त कर चुके हैं इस कारण NEFT और RTGS को समझने में हमें अब ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। आइए देखते है NEFT क्या होता है –

NEFT क्या होता है ? What is NEFT in Hindi

सबसे पहले यह जान लेते हैं कि NEFT का full form क्या होता है?

NEFT का Full form – National Electronic Fund Transfer होता है।

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NEFT भी IMPS की तरह ही एक प्रकार की भुगतान प्रणाली है जो कि RBI (RESERVE BANK OF INDIA) द्वारा संचालित की जाती है, इसका अर्थ यह है कि NEFT एक केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली व्यवस्था है। इसके माध्यम से हम आसानी से किसी एक बैंक अकाउंट से दूसरे अकाउंट पर इलेक्ट्रॉनिक मुद्रा प्रेषित कर सकते है, यह भी 24*7 के तर्ज पर कार्य करने में सक्षम है।

हालांकि शुरुआत में NEFT, 24 * 7 कार्य नहीं करता था। और यह एक लिमिटेड समय के अंतर्गत ही कार्य करता था अर्थात आप इस विधि के माध्यम से पहले एक तयशुदा समय सीमा के भीतर ही भुगतान कर सकते थे। परंतु अब इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने इसे 24 * 7 की तर्ज पर भारतीयों के लिए खोल दिया है अर्थात अब हम इसके माध्यम से दिन के 24 घंटे में किसी भी वक्त भुगतान कर सकते हैं।

अब चूंकि हमें ज्ञात हो चुका है कि अनियमित क्या होता है तो आइए अब हम इन दोनों के मध्य के अंतर को समझते हैं –

RTGS क्या होता है? What is RTGS in hindi

सबसे पहले यह जान लेते हैं कि RTGS का full form क्या होता है?

RTGS का Full form – Real Time Gross Settlement होता है।

RTGS या Real Time Gross Settlement, IMPS की तरह ही एक अन्य भुगतान करने की भारतीय प्रणाली है। अन्य विकल्पों की तरह RTGS भी त्वरित रूप से भुगतान करने की सुविधा प्रदान करती है।

जैसा कि RTGS के शुरुआत के दो अक्षर Real और Time को प्रकट करते हैं, वास्तव में इसका कार्य भी इसके नाम के जैसा ही होता है। अर्थात जैसे ही बैंक को किसी RTGS के माध्यम से भुगतान करने का ऑर्डर आता है, तो इसमें लगने वाली प्रक्रिया त्वरित रूप से कार्य करना आरंभ कर देती है, और यही कारण है कि RTGS के आरंभ के दो शब्द Real Time को संबोधित करते हैं जो कि वास्तविक समय के समतुल्य है।

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अब यदि हम RTGS के अंत के 2 शब्दों Gross Settlement पर ध्यान दें तो इससे साफ प्रकट होता है कि यहां पेमेंट की विधि ग्रॉस पर आधारित है जहां हमने ऊपर देखा कि NEFT में Batches के आधार पर transaction पूर्ण होता है अर्थात यहां आपको किसी भी प्रकार से इंतजार करने का जरूरत नहीं पड़ता है, जैसा कि NEFT के लिए दिन के अंत तक आने वाले सभी ट्रांजैक्शंस का एक समूह बनाकर उसे अंत में पूर्ण किया जाता था परंतु आरटीजीएस में आपके द्वारा किए गए ट्रांजैक्शन के कमांड (command) को त्वरित उसी समय पर (अर्थात वास्तविक समय पर) पूर्ण किया जाता है।

अब जो कि हम तीनो का अर्थ (IMPS, NEFT और RTGS) जान चुके हैं अब आइए इन तीनो के मुख्य अंतर को समझते है –

IMPS, NEFT और RTGS में क्या अंतर है? IMPS vs NEFT vs RTGS in hindi

विषय IMPSNEFTRTGS
अर्थ इंटरमीडिएट पेमेंट सर्विस नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रांसफर रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट 
परिभाषा यह तीव्र गति से मुद्रा के स्थानांतरण का डिजिटल विधि है। यह एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट पर इलेक्ट्रॉनिक मुद्रा के सुगम हस्तांतरण की विधि है।यह वास्तविक समय पर एकमुश्त मुद्रा ट्रांसफर की विधि है। 
न्यूनतम ट्रांसेक्शन सीमा         1 ₹1 ₹2 लाख ₹
अधिकतम ट्रांसेक्शन सीमा 5 लाख ₹ तक कोई सीमा नहीं कोई सीमा नहीं 
सेटलमेंट टाइम तुरंत प्रत्येक घंटे के बैच में तुरंत 
उपलब्धता 365 दिन – 24*7 365 दिन – 24*7 आधिकारिक समय 
ट्रांसक्शन चार्जेसबैंक दर बैंक पर निर्भर बैंक दर बैंक पर निर्भरबैंक दर बैंक पर निर्भर

IMPS से संबंधित अन्य प्रश्न | FAQs related to IMPS

प्र. अपना MMID कैसे generate कर सकते है ?

उ.  MMID या जिसे Mobile Money Identifier के नाम से भी जाना जाता है। इसे भी निम्नलिखित तीन तरीकों से जनरेट किया जा सकता हैं- 

  1. Mobile banking
  2. Net banking
  3. Phone banking

आइए एक करके देखते हैं कि अपने MMID को उपरोक्त माध्यमों से कैसे जनरेट करें –

Mobile banking के माध्यम से अपना MMID कैसे जनरेट करे?

  • इसके लिए सबसे पहले अपने मोबाइल पर अपने बैंक के ऑफिशियल एप्लीकेशन को ओपन करें।
  • इसके पश्चात एप्लीकेशन के मध्य भारत पर क्लिक करें और अकाउंट विकल्प का चयन करें।
  • यहां पर आपको एक टैक्सी देगा जिस पर लिखा रहेगा – “Generate MMID” इस पर क्लिक करके आगे की प्रक्रिया को नियमानुसार पूरा करें।

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Net banking के माध्यम से अपना MMID कैसे जनरेट करे?

  • सबसे पहले अपने बैंक के ऑफिशियल पेज पेज पर जाएं और अपना लॉगइन पूर्ण करें।
  • अब जैसे आप लॉगइन सकते हैं आप अपने नेट बेंकिंग के डैशबोर्ड पर पहुंच जाते हैं यहां पर आपको अलग से एक “Generate MMID” नाम का टैब दिखाई देगा। इस पर क्लिक करके आपको आगे की कार्यवाही को पूरा करना है।

Phone banking के माध्यम से अपना MMID कैसे जनरेट करे?

  • इस विधि के माध्यम से आपको अपने बैंक के ऑफिशियल कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करना है।
  • जैसे ही आपकी ग्राहक सेवा अधिकारी से वार्तालाप आरंभ हो आपको उनसे MMID Generationके लिए आग्रह करना है।
  • आने वाली 24 घंटे के समय के भीतर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर MMID, बैंक की ओर से भेज दिया जाता है जाता है।

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प्र. अपने मोबाइल के लिए mPIN कैसे जनरेट कर सकते है?

उ. mPIN या जिसे Mobile Banking Personal Identificationl Number के नाम से भी जाना जाता है। यह मूलतः 4 से 6 अंक का एक गोपनीय numerical format में बैंक के माध्यम से मोबाइल बैंकिंग हेतु प्रदान किया जाता है।

ATM pin की तरह ही mPIN भी किसी ट्रांजैक्शन को पूर्ण करने हेतु प्रयोग में लाया जाने वाला पिनकोड होता है।

वैसे इसे तीन प्रकार की विधियों से जनरेट किया जा सकता है –

  1. मोबाइल बैंकिंग
  2. इंटरनेट बैंकिंग
  3. फोन बैंकिंग

तीनो की प्रक्रिया मिलती जुलती ही है इसलिए आपको यहां हम मोबाइल बैंकिंग जोकि इन सब में सबसे कॉमन विधि होती है, उससे mPIN जनरेट करने की विधि को बता रहे हैं –

इसे जनरेट करने के लिए सबसे पहले आपके बैंक अकाउंट से आपका मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए। इसके बाद आपको अपने मोबाइल पर आपके बैंक का ऑफिशल एप्लीकेशन डाउनलोड करके उसमें मोबाइल बैंकिंग हेतु अप्लाई करना चाहिए।

अप्लाई करने की प्रक्रिया में आप देखेंगे कि आपके मोबाइल नंबर की जांच की जाती है कि क्या यह मोबाइल नंबर आपके बैंक के साथ लिंक है या नहीं।

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एक बार इस चीज की पुष्टि हो जाने के बाद आपको आपके मोबाइल नंबर पर बैंक के माध्यम से OTP भेजा जाता है। इसको डीपी को पुनः दर्ज करने के पश्चात आपसे आपके मोबाइल बैंकिंग हेतु एक पिन जनरेट करने को कहा जाता है जिसे मोबाइल बैंकिंग का पासवर्ड या mPIN भी कहा जाता है।

इस प्रकार आप अपने मोबाइल बैंक के ऑफिशल एप्लीकेशन के माध्यम से अपना mPIN आसानी से जनरेट कर सकते हैं।

प्र. ATM PIN क्या होता है?

उ. आप जब कभी भी ATM पैसे निकालने (withdrawl) या जमा करने (deposit) जाते हैं, तो ATM मशीन द्वारा आप से ट्रांजैक्शन के लिए आपका ATM का PIN पूछा जाता है।

वास्तव में यह ATM PIN कुल 4 अंकों का स्वनिर्मित पिन होता है जो कि इस प्रारूप में होता है – XXXX.

इस X के स्थान पर 0 से लेकर 9 तक कोई भी संख्या हो सकती है। तो जिस ATM CARD के साथ लगने वाले 4 अंक के पिन को ही ATM PIN कहा जाता है।

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हालांकि शुरुआत में जब आपको बैंक की तरफ से ATM CARD प्रदान किया जाता है तो यह सीलबंद लिफाफे में प्राप्त होता है। आप इस लिफाफे के भीतर ATM CARD और एक कागज पर चार अंकिय पिन प्राप्त करते हैं। जब कभी आप पहली बार इस एटीएम कार्ड का प्रयोग करते हैं तो आपको कहा जाता है कि अपने एटीएम कार्ड का पिन को तुरंत बदल लेवे या सुरक्षा की दृष्टि से माना जाता है और इसलिए कहा जाता है कि एटीएम पिन स्वनिर्मित 4 अंकीय पिन होता है।

प्र. ATM CVV नंबर क्या होता है?

उ. एटीएम कार्ड के पीछे में एक तीन अंकी नंबर दिया गया होता है जिसे एटीएम कार्ड का CVV या card verification value के नाम से जाना जाता है।

यह प्रत्येक एटीएम कार्ड के लिए अलग-अलग होता है जो कि एटीएम कार्ड के पिछले भाग पर magnetic strip के पास दिखाई देता है।

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अंतिम शब्द : IMPS क्या है ? 

IMPS भारतीय भुगतान प्रणाली की एक प्रसिद्ध भुगतान विधि है जिसके माध्यम से आज भारत में लाखो डिजिटल लेनदेन संभव हो पाए हैं। भारत सरकार के द्वारा इसे डिजिटली ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए निर्मित किया गया था वर्तमान में यहां 24 * 7 के तर्ज पर प्रत्येक समय के लिए उपलब्ध है।

जिस उद्देश्य से भारत सरकार ने इसका निर्माण किया था यह उद्देश्य पूर्ण होता दिखाई देता है साथ ही हमें त्वरित भुगतान की विधि प्राप्त होती है जिसके माध्यम से हम आसानी से अपने किसी जानकार को कुछ ही क्षण में पैसे का ट्रांसफर कर सकते हैं। वर्तमान समय में डिजिटली ट्रांजैक्शन का दायरा दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है जो कि एक अच्छा संकेत माना जा रहा है।

इस लेख के माध्यम से हमने आपको IMPS के विषय में जानकारी प्रदान की है इसमें IMPS क्या है, आइएमपीएस का इतिहास आइएमपीएस से होने वाले लाभ-हानि और IMPS, NEFT और RTGS के मध्य के अंतर को देखा।

आशा करता हूं कि इस लेख के माध्यम से आपको IMPS के विषय में सभी जानकारी प्राप्त हो गई होगी। फिर भी यदि आपके मन में आइएमपीएस से संबंधित किसी प्रकार का प्रश्न अभी विशेष है तो आप नीचे कमेंट बॉक्स के माध्यम से इसे स्पष्ट कर सकते हैं हम आपके द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर  देने का यथासंभव प्रयास करेंगे। धनयवाद। 

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